21 सितम्बर 2026 · तेजा दशमी / रामदेव जयंती / खेजड़ली बलिदान दिवस
संकल्प 21
एक दिन का उपवास, नशामुक्त समाज के लिए एक लोकसंकल्प
21 सितम्बर को तेजा दशमी, बाबा रामदेवजी जयंती एवं खेजड़ली बलिदान दिवस के पावन अवसर पर आइए, एक दिन का स्वैच्छिक उपवास कर नशे की सामाजिक स्वीकृति के विरुद्ध अपना लोकसंकल्प व्यक्त करें।
यह उपवास किसी व्यक्ति के विरोध में नहीं है। यह उस सामाजिक सोच को बदलने का शांतिपूर्ण प्रयास है जो नशे को आतिथ्य, परंपरा, सामाजिक व्यवहार अथवा प्रतिष्ठा का हिस्सा मानती है।
एक दिन स्वयं के लिए संयम, एक संकल्प समाज के लिए।
सजीव आँकड़े
संकल्प 21 से अब तक
पंजीकरण होते ही यह संख्या बढ़ जाती है।
प्रेरणा
लोकदेवताओं की प्रेरणा से लोकसंकल्प
राजस्थान की लोकचेतना में वीर तेजाजी त्याग, वचन, साहस और गौ-रक्षा के अनुपम प्रतीक हैं। लोकमान्यता में उन्होंने गायों की रक्षा के लिए अपने प्राणों तक की परवाह नहीं की और अपना दिया हुआ वचन अंतिम क्षण तक निभाया।
तेजाजी का जीवन हमें यह संदेश देता है कि सच्चा संकल्प वही है जिसके लिए व्यक्ति अपने निजी हित और सुविधा से ऊपर उठ सके।
आज हमारे सामने चुनौती अलग है। आज हमारे बच्चों, युवाओं और परिवारों को नशे से बचाने के लिए किसी शस्त्र की नहीं, बल्कि संकल्प, संयम और सामाजिक साहस की आवश्यकता है।
जिस प्रकार तेजाजी ने गौ-रक्षा के लिए अपना वचन निभाया, उसी भावना से इस तेजा दशमी पर हम भी एक वचन लें :
हम नशे को सामाजिक स्वीकृति नहीं देंगे।
न अपने घर में, न अपने उत्सव में, न अपनी परंपराओं के नाम पर, और न किसी सामाजिक मनुहार के रूप में।
इसी पावन दिन लोकदेवता बाबा रामदेवजी की जयंती भी हमें सेवा, सामाजिक समरसता और मनुष्य-मनुष्य के बीच भेदभाव से ऊपर उठकर लोककल्याण की प्रेरणा देती है।
यही दिन खेजड़ली बलिदान दिवस के रूप में भी स्मरण किया जाता है, जब खेजड़ी के वृक्षों की रक्षा के लिए दिए गए बलिदान ने यह सिखाया कि जीवन की रक्षा के लिए खड़ा होना ही सबसे बड़ा धर्म है।
इसलिए संकल्प 21 केवल व्यक्तिगत उपवास नहीं है। यह तेजाजी के साहस और त्याग तथा बाबा रामदेवजी की सेवा और सामाजिक समरसता से प्रेरित एक लोकसंकल्प है :
नशे की सामाजिक स्वीकृति के विरुद्ध, स्वस्थ परिवार और संवेदनशील समाज के पक्ष में।
- तेजाजी के त्याग की स्मृति में संकल्प।
- बाबा रामदेवजी की लोकमंगल भावना से सेवा।
- और नशामुक्त समाज के लिए एक दिन का उपवास।
पंजीकरण
संकल्प 21 में पंजीकरण करें
पंजीकरण निःशुल्क है। इससे यह गिना जा सकेगा कि 21 सितम्बर को कितने लोग एक साथ खड़े हैं।
धन्यवाद, आपका संकल्प दर्ज हो गया है।
आप अब संकल्प 21 की जनयात्रा का हिस्सा हैं।
21 सितम्बर · तेजा दशमी एवं बाबा रामदेवजी जयंती
अब आपको दो काम करने हैं
- 21 सितम्बर को उपवास रखें। एक दिन का स्वैच्छिक उपवास, नशे की सामाजिक स्वीकृति के विरुद्ध।
- गाय को गुड़, रोटी अथवा हरा चारा खिलाएँ, अथवा खेजड़ली बलिदान दिवस के सम्मान में पौधा लगाएँ या पेड़ को पानी दें और उस क्षण की फोटो करुणा 21 पर भेजें। फोटो भेजने का फ़ॉर्म 21 सितम्बर को इसी पृष्ठ पर खुला मिलेगा।
फोटो भेजते ही आपको करुणा 21 का डिजिटल प्रमाणपत्र मिलेगा।
व्हाट्सएप पर याद रखने के लिए भेजें
यह संदेश आप स्वयं को या अपने समूह को भेज सकते हैं, ताकि 21 सितम्बर को याद रहे।
उपवास के साथ सेवा का एक कर्म
करुणा 21
तेजा दशमी के दिन आपका उपवास केवल स्वयं तक सीमित न रहे।
वीर तेजाजी की गौ-रक्षा के प्रति अद्वितीय निष्ठा की स्मृति में 21 सितम्बर को अपने उपवास के दौरान किसी गाय को अपने हाथों से गुड़, रोटी अथवा हरा चारा खिलाएँ।
अथवा खेजड़ली बलिदान दिवस के सम्मान में पौधा लगाएँ या पेड़ को पानी दें।
इस सेवा कार्य की एक फोटो लें। यह फोटो आपको करुणा 21 के लिंक पर अपलोड करनी होगी। यह लिंक 21 सितम्बर को इसी पृष्ठ पर खुला मिलेगा।
यह छोटा सा कर्म केवल एक फोटो के लिए नहीं, बल्कि उस भावना का प्रतीक हो :
जो निर्बल के प्रति करुणा रखता है, वही समाज के प्रति उत्तरदायित्व भी समझता है।
एक उपवास · एक संकल्प · एक सेवा
फोटो अपलोड 21 सितम्बर को
उस क्षण की एक फोटो लें। 21 सितम्बर को यहीं पर फोटो भेजने का फ़ॉर्म खुला मिलेगा, और आप इस सामूहिक करुणा-श्रृंखला का हिस्सा बन सकेंगे।
आपकी करुणा दर्ज हो गई।
तेजाजी की स्मृति में आपका करुणा कर्म इस सामूहिक श्रृंखला का हिस्सा बन गया है।
डिजिटल प्रमाणपत्र
करुणा 21 प्रमाणपत्र
यह प्रमाणित किया जाता है कि
आपका नामने संकल्प 21 के उपवास के साथ करुणा का कर्म पूर्ण किया।
“जो निर्बल के प्रति करुणा रखता है, वही उत्तरदायित्व भी समझता है”
नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत
नई किरण नशा मुक्ति केंद्र, राजकीय डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर द्वारा प्रदत्त
दिनांक आज
तेजाजी की स्मृति में मेरा करुणा कर्म।
लोकदेवताओं से प्रेरणा
नशामुक्त समाज का लोकसंकल्प
अपने गाँव, वार्ड और विद्यालय में भी यह संदेश पहुँचाइए। एक संकल्प से दस संकल्प बनते हैं।